रोसड़ाः एक बार फिर जिला बनाने की चल पड़ी है मुहिम

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Description

वर्ष 1994 में घोषित जिला रोसड़ा आज भी जिला का दर्जा पाने को छटपटा रहा है। जनमानस में इसकी परिकल्पना आज भी हिलौड़े मार रहीं है। यदा कदा आन्दोलन की रूप रेखा भी बनी है, आन्दोलन होते भी रहे है। कभी रोसड़ा वासियों ने तो कभी मीडिया वालों ने तो कभी दलीय लोगों ने अभियान चलाया। लेकिन कुछ दिन आन्दोलन चलकर फिर थक हार कर लोग अपने अपने घरों में बैठ जाते रहे है। विधानसभा एवं लोकसभा चुनाव में यह मुद्दा हमेशा बनता रहा है। अनुमंडल के स्थापना दिवस के अवसर पर मीडिया कर्मियों ने लोक भावना के स्वर को जगह देखकर हमेशा इसे चर्चा में अवश्य रखा है। लेकिन हर बार इसके संर्घष समिति में वैसे लोग आकर बैठ जाते रहे कि आन्दोलन दौड़ने के बदले शिथिल होकर रह जाते रहे है। कभी दलीय बंधन तो कभी हम हम के चक्कर में आन्दोलन शिथिल होते रहे। कोष संग्रह से लेकर अभियान के लिए लोगों को एकत्रित करने में युवाओं ने हमेशा बड़ी भूमिका निभायी है। एक बार फिर रोसड़ा के युवाओं ने रोसड़ा को जिला का दर्जा दिलवाने के लिए अभियान चलाया है। मुहिम चल पड़ी है। हसताक्षर अभियान भी चल रहे है। रैली निकालने की तिथि मुर्करर कर दी गयी है। जगह जगह बैठकों का दौड़ जारी है। युवाओं को एकत्रित कर आन्दोलन को शहर के बाद गांवों में चलाने की सहमति बन रहीं है। लेकिन आज भी रोसड़ा के वै कद्छावर जो हर चुनाव में भाग्य आजमाने आ जाया करते है। वे कहीं भी दिख नहीं रहे है। न तो जीतने वाले और नहीं हारने वाले उम्मीदवार कहीं दिख रहे है।
मेरी अपनी राय
मैं तो कहता हूॅं रोसड़ा अनुमंडल क्षेत्र के विधायकों एवं सांसदों के अलावे पराजित एवं उम्मीदवारी दे चुके सभी को शामिल कर एक विशाल धरना का आयोजन होना चाहिए । वह भी कर्पूरी स्टेडियम में जिसमें हारने व जीतने वाले सभी दल के उम्मीदवार एवं सभी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता तथा पंचायती राज के जनप्रतिनिधि को इसमें शामिल किया जाना चाहिए। प्रिंट एवं इलेक्टानिक मीडिया के लोगों को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए। आन्दोलन एक या दो दिन का नहीं बल्कि महीनों या हम कह सकते है कि जब तक बिहार के सीएम की घोषणा न हो जाय तब तक चलते रहना चाहिए। वैसे यह मेरी व्यक्तिगत राय है।

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