समस्तीपुरः बगैर लाईसेंस के वाहनों में भेड़ बकड़ियों की तरह बैठाये जाते है यात्री

समस्तीपुर जिले में इन दिनों सड़क यातायात की खुलकर धज्जियां उड़ रहीं है। पुलिस के उगाही तंत्र मजबूत रहने के कारण पटल पर वाहनों की रफ्तार से लेकर यातायात कानून की धज्जियां उड़ायी जा रहीं है। रविवार को ट्रक-ऑटो की टक्कर से हुई दस लोगों की मौत ने यातायात नियम की पोल खोलकर रख दी है। यह हादसा कई प्रश्न खड़ा कर रहा है। क्या इन प्रश्नों के जबाब प्रशासन के पास है? यदि नहीं तो फिर इसका जबाब कौन देगा?
सवाल
1. ऑटो पर कितने लोगों को बैठाया जा सकता है?
2.क्या ऑटो पर एक दर्जन लोगों के बैठने की जगह है? यदि हॉ तो कोई बात नहीं और नहीं? तो आखिर भेड़ बकड़ियों की तरह ऑटो पर सवारी को बैठाने पर रोक कौन लगायेगा?
3. बिना लाईसेंस के ऑटो चलाने व यातायात पुलिस द्वारा वसूली करते आप रोज देख सकते है।
4. ट्रक चालक द्वारा अपने वाहन को हवा की रफ्तार में चलाने की ईजाजत आखिर कौन देता है?
5. बाईक सवार के स्पीड पर ब्रेक कौन लगवायेगा?
6. हेलमेट, लाईसेंस के नाम पर उगाही करने से यातायात की समस्या से निजात मिल सकेगा?
7. बड़े वाहनों के सामने छोटे वाहनों की लगातार भीड़त के लिए सबसे दोषी अगर कोई है तो वह प्रशासन। ऐसा हम इसलिए कह रहे है कि लाईसेंस निर्गत करने में दलालों का जमावड़ा के कारण बगैर लाईसेंस के सौ में अस्सी वाहन सड़क पर दौर रहे है ।
8.कुल मिलाकर कह सकते है कि जिले में यातायात की व्यवस्था कागजों पर ही चल रहा है। पटल पर भगवान भरोसे चल रहा है।

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