बंगाल की घटना में विपक्ष की एकजुटता पर औंधे मुहॅं गिरे मोदी

केन्द्र की मौजूदा सरकार चुनावी रंग में रंग गयी है। वह अब चुनाव की रणनीति के तहत हर स्टेट में कार्य करने लगी है। शायद यहीं कारण है कि ममता बनर्जी ने केन्द्र की कार्रवाई के खिलाफ हो गयी है। आपको याद होगा बिहार में 1989-90 की घटना जब बिहार के सीएम ने लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार किया था। उन्हें रैली नहीं करने दी गयी थी। रथयात्रा रोक दी गयी थी। उस समय बीजेपी केन्द्र की सत्ता में बाहरी समर्थन दे रखी थी। बीपी सिंह की सरकार गिर गयी थी। ठीक उसी प्रकार बंगाल की ताजा घटनाक्रम में जितनी मुहॅं उतनी बातें की जा रहीं है।

लेकिन जरा सोचिए! केन्द्र की सरकार दिल्ली सरकार के साथ किस प्रकार से पेश आती है। बिहार में लोकतंत्र की हत्या कर राजद से समर्थन वापस करवा कर जदयू के साथ सरकार बनवा लेती है। बंगाल की घटना अभी सबके सामने है। ऐसे में मेरा मानना है कि केन्द्र व राज्य सरकार के कार्य करने का तरीका अलग अलग है। केन्द्र यदि राज्य में कार्रवाई करती है तो उसे वहाॅं के सीएम को जानकारी देनी होगी। वह तानाशाही में कोई कदम नहीं उठा सकती है। लेकिन इंदिरा गांधी के बाद नरेन्द्र मोदी का तानाशाही रूप अब सबके सामने आ रहा है। ऐसे में पुरे देश के विभिन्न राजनीतिक दल एकजुट होकर मोदी के कार्रवाई का विरोध करने लगे है। कोई ममता को सही तो कोई मोदी को सही करार दे रहे है, लेकिन मेरा मानना है कि केन्द्र व राज्य शासन अपने अपने अधिकार एवं कर्तव्य का पालन करने से गुरेज कर रहे है। फलस्वरूप इस प्रकार की घटना घटित होना लाजमी है।

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