बुरा ना मानो होली है फेज-1: बात बनाने का नम्बर वन गुरूजी मोदी

वैसे इन पांच वर्षो में मोदी नाम का मास्टर माईन्ड गुरूजी काफी लोकप्रिय हुये है। वे दूसरों से ईतर चलते है। दूसरों से अलग बोलते है। इतिहास, भूगोल को भी बदल देते है। संविधान संशोधन कर आरक्षण समाप्त करने की भाषा बोलते है और अंत में आरक्षण बांटने लग जाते है। कर्ज माफी की बात कर सत्ता में आते है और बाद में कर्ज माफी को समस्या का निदान नहीं मानने लगते है। दो करोड़ रोजगार हर साल देने की बातें करते है और आॅटो खरीदने वाले एवं पकौड़ा का व्यवसाय करने वालों को रोजगार मिलना बताते है। क्षेत्रीय दलों को धमकाते है, सीबीआई का डर दिखाते है। ईडी को भेजकर डर पैदा करवाते है बाद में अपने दल में दल का विलय करवा लेते है, या अपने दल से उस दल का गठजोड़ बनवा लेते है। काला धन लाने की बात करते है। लेकिन काला धन कहाॅं है इसका पता तक नहीं लगा पाते है। नोटबंदी कर जीडीपी बढ़ाने की बात करते है। जीएसटी लगाकर व्यापारियों को उलझाते है। कहते है विदेशों से व्यापारिक संबंध बना रहे है। राफेल जैसे सौदे में धांधली की बात पर बदजुबानी बोलते है। कुल मिलाकर कह सकते है कि हर लाईन में मास्टर माईन्ड कोई है तो वह है गुरूजी मोदी ।

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