देशवासियों के विश्वास के साथ झूठ व सच का धिनौना खेल आखिर कब तक ?

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जम्मू कश्मीर में आतंकवाद खत्म हुआ या नहीं लेकिन बीजेपी का जो प्लान है, वह 100 प्रतिशत सफल हो गया। 56 इंच का सीना कहकर नरेन्द्र मोदी की भाजपाई टीम ने पूरे देश में मोदी लहर को कायम करने के लिए एक से बढ़कर एक पैतरा अपना अवश्य लिया है। जिसके काट में विपक्ष के पास कुछ भी नहीं है। विजय जुलूस में एक एक भाजपाईयों का कस्बे से लेकर गांव तक शामिल होना और हाथ में भाजपाई झंडे की जगह तिरंगा लेकर चहलकदमी करना इसका जीता जागता सबूत है। 2019 का चुनाव जीतने के लिए मोदी मिशन का पहला प्लान था की किसानों का पूर्ण कर्ज माफी ना करके महज एक साल के लिए सभी कियानों को 6000 रूपये देकर किसानों का वोट हासिल कर लिया जाय। दूसरा प्लान सवर्ण को खुश करने के लिए दस प्रतिशत का आरक्षण देकर तथा तीसरा प्लान के तहत पाकिस्तान के खिलाफ होकर भारत के हिन्दुओं का शत प्रतिशत वोट हासिल करने की रणनीति पर कार्य कर चुनाव में मिशन चार सौ को पूरा करने का है। अब सवाल उठता है क्या देश बदल रहा है? सीमा सुरक्षा में अब सेंधमारी नहीं होगी? आतंकवादी अब सैनिकों पर हमला नहीं करेंगे अनुच्छेद 35 ए तथा धारा 370 खत्म होंगे, या फिर इन मामलों में देश की जनता को उलझाकर विकास की बातों, बेरोजगारी का सवाल, बिहार का विशेष पैकेज, किसानों के मामले, को दरकिनार करते हुये चुनाव में विजय हासिल किया जा सकता है। मामले को भटकाकर देश की जनता को बहकाकर 2019 को सफल करने के मिशन में बीजेपी की सेना कब तक देश की जनता को बरगलाती रहेगी। पिछले चुनाव में किये गये वादों में से एक भी पूरा नहीं करने के बाद भी 2019 में वोट मांगने का क्या औचित्य ? जाति जाति के बाद अब धर्म धर्म खेलने का यह खेल चल रहा है। जम्मू कश्मीर यदि भारत का है तो उसे भारत के एक झंउे के तले लाईए। दो झंडा क्यों? राम मंदिर के नाम पर वोट मांग कर सत्ता में आने के बाद आखिर राम मंदिर क्यों नहीं बना? अनेको सवाल है, जिसका जबाब नहीं है? यदि है तो मोदी भक्त के लिए तर्क के सिवाय कुछ भी नहीं है।

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