महापर्वः संसदीय चुनाव – बिहार में घमासान

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लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही अब संग्राम की तैयारी भले ही पूरे देश में हो रहीं है। लेकिन बिहार की सभी चालीस सीटों पर घमासान मचना तय है। घमासान का एक कारण यह है कि मुकाबले हर सीट पर आमने सामने का है। दो दलों के बीच मुकाबले का नाम महागठबंधन एवं राजग है। एक का नेत्त्व कांग्रेस तथा दूसरे का बीजेपी कर रहीं है। महागठबंधन में नेताओं की भरमार है। लेकिन कई दिग्गजों को टिकट नहीं मिल रहा है। ऐसे नेताओं के पैर खिंचने में अहम भूमिका की भी चर्चा है। राजद , कांग्रेस, हम, भीआईपी, रालोसपा एवं लोकतांत्रिक जनता पार्टी के बीच चालीस सीट को बांट पाना मुश्किल हो रहा है। शरद को खुश करने से जीतन नाराज हो जाते है। कुशवाहा को खुश करने पर कांग्रेस नाराज होते है। राजद को अपने सभी नेताओं को खुश कर पाना भी कठिन है। ऐसे में अब्दुल बारी सिद्दकी, रघुवंश प्रसाद सिंह, मीसा भारती, राबड़ी देवी, आलोक कुमार मेहता, बुलो मंडल, जगदानन्द सिंह, कृष्णा यादव, भाई वीरेन्द्र, हीना सहाब,रालोसपा के उपेन्द्र कुशवाहा, कांग्रेस के कीर्ति आजाद, अनंत सिंह, डॉ अशोक कुमार, रंजीता रंजन, लवली आनंन्द, मदन मोहन झा, अखिलेश प्रसाद सिंह,, हम के जीतन राम मांझी, वीआईपी के मुकेश सहनी, लोकतांत्रिक जनता पार्टी के शरद यादव जैसे दिग्गज को इस चुनाव में मैदान में उतरने की मंशा है। इन सबको उतार पाना मुश्किल है। इसी प्रकार बीजेपी एवं जदयू एवं लोजपा के बीच भी इसी प्रकार की समस्याएं है। बीजेपी अपने जीते पांच सांसदों को पहले ही इगनोर कर चुकी है। क्योंकि उन्हें महज 22 की जगह 17 सीट पर ही लड़ना है। लोजपा को अपने एक दो सांसद को फेर बदल करने का मिजाज है। वैसे लोजपा आधे सीट पर अपने परिवार के ही उम्मीदवार को उतारने जा रहीं है। जदयू के पास भी मुश्किलें कम नहीं है। टिकट की घोषणा के साथ ही बागियों की संख्या में बढ़ोतरी से चुनावी माहौल चर्चा में रहने की आशंका है।

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