समस्तीपुरः शव हटाने के बदले शराब हटाने में क्यों जुटी पुलिस?

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कुचलकर तीन मौत मामले में पुलिस शव को हटाने के बदले शराब हटाने में क्यों जुटी? क्या पुलिस को शराब कारोबारियों से टांका जुड़ा हुआ था? उक्त वाहन पर शराब यदि थी तो वह किसका था? पुलिस से उसका क्या संबंध है? क्या सचमुच शराब उक्त वाहन पर था या अफवाह फैलायी गयी? ऐसे कई सवाल हिलौड़ें मार रही है। यदि उक्त वाहन पर शराब थी तो वह किसका था। रोसड़ा शिवाजीनगर के रास्ते वह शराब कहॉं पहुॅंचाया जा रहा था? ऐसे कितने सवाल है, जो रोसड़ा शिवाजीनगर क्षेत्र के शराब माफियाओं के लिए पुलिस के संबंध का खुलासा करती है। चर्चा है कि रोसड़ा एवं शिवाजीनगर की पुलिस ग्रामीण ईलाकों में शराब की बिक्री करवाती है। इसके बदले वु चौकीदारों से उगाही करवाती है। फलस्वरूप शराब पीने वालों को तो वह पकड़ती है, लेकिन बेचने वालों को नहीं? शिवाजीनगर में ओपी के समीप ही शराब बिकती है। रोसड़ा का मोतीपुर, हरिपुर, पंचगामा, चकथात, महुली, हिरमिया, सोनूपुर, मुरादपुर, एरौत, शिवाजीनगर का देवनपुर, बाघोपुर, बल्लीपुर, गाहर, खानपुर का धाईध, अमसौर, करूआ, ईलमासनगर के ईलाके में आप एक से दो घंटे के अन्दर शराब मंगवा सकते है। इस ईलाके के शराब के कारोबारी जो शराब बरामदगी मामले में जेल गये या केस में नामजद है, उन्हें पुलिस से सीधा संबंध स्थापित है। इसलिए वे इन पर कार्रवाई नहीं करते है। ऐसी चर्चा है कि रोसड़ा एवं शिवाजीनगर की पुलिस के चौकीदार इन सबकी उगाही में पूरे दिनभर रहती है। अब सवाल उठता है कि समस्तीपुर पुलिस के आलाधिकारी इन शराब कारोबारियों पर अंकुश लगा पाने में स्वंय को असमर्थ क्यों समझ रहीं है। होली के लिए हर ईलाके में शराब की खेप जमा की जा रहीं है। मंगलवार को शिवाजीनगर में उक्त वाहन पर शराब थी तो वह कहॉं गयी, यह सार्वजनिक करने की मांग आम जन कर रही है।

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