समस्तीपुर संसदीय सीटः बदले समीकरण में रामचन्द्र की जय-जय…लेकिन सर्तकता गयी दुर्घटना घटी….!

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वर्ष 2014 के चुनाव से इस बार का चुनाव समस्तीपुर में काफी भिन्न है। पिछले चुनाव में बीजेपी एवं लोजपा तथा रालोसपा का गठबंधन था। तब लोजपा उम्मीदवार रामचन्द्र पासवान को 270401 वोट मिले थे। कांग्रेस एवं आरजेडी गठबंधन के डॉ अशोक कुमार बिहार में सबसे कम वोट 6872 वोट से चुनाव हार गये थे। इन्हें 263529 वोअ मिले थे। जबकि अकेले जदयू के महेश्वर हजारी को 200124 वोट मिले थे। ऐसे में इस बार रामचन्द्र एवं महेश्वर हजारी के वोट को जोड़ दिया जाय तो रामचन्द्र की जय-जय होना तय है।वैसे भी रामचन्द्र एवं महेश्वर हजारी एक दूसरे के करीबी रिश्तेदार है। महेश्वर हजारी कल्याणपुर के विधायक भी है और मंत्री भीं। इस सीट पर वर्ष 2009 तक सामान्य वर्ग के लोग सांसद हुआ करते थे। वर्ष 2009 में यह आरक्षित हो गया। तत्कालीन रोसड़ा संसदीय सीट को समाप्त कर समस्तीपुर लोकसभा सुरक्षित सीट नामकरण किया गया। 2009 में महेश्वर हजारी सांसद चुने गये। 2014 में रामचन्द्र पासवान सांसद बने। 2019 में एनडीए में जदयू, बीजेपी एवं लोजपा है। इसलिए लोजपा के रामचन्द्र पासवान को टिकट मिलना तय माना जा रहा है। दूसरी ओर राजद, कांग्रेस, रालोसपा, हम, वीआईपी समेत अन्य पार्टी से महागठबंधन बना है। इससे कांग्रेस के डॉ अशोक कुमार को टिकट मिलना तय माना जा रहा है। कुल मिलाकर आप कह सकते है कि रोसड़ा की जनता को आरक्षित सांसद ही मिलता रहा है। 1967 में केदार पासवान,1971 में राम भगत पासवान,1977 में रामसेवक हजारी,1980 में बालेश्वर राम, 1984 मेंरामभगत पासवान,1989 में दशई चौधरी, 1991 में रामविलास पासवान,1996 एवं 1998 में पीताम्बर पासवान, 1999 एवं 2004 में रामचन्द्र पासवान को सांसद चुनने का मौका मिला । सबसे आश्चर्य जनक पहलू यह है की संसदीय क्षेत्र रोसड़ा हो या समस्तीपुर, लेकिन रोसड़ा विधानसभा की जनता को रामविलास पासवान एवं उनके सगे भाई रामचन्द्र पासवान ने 20 वर्ष तक प्रतिनिधित्व किया। दूसरे महेश्वर हजारी के पिता रामसेवक हजारी एवं स्वंय महेश्वर हजारी ने आठ वर्षो तक शासन किया। तीसरे डॉ अशोक कुमार के पिता बालेश्वर राम ने चार वर्ष तक प्रतिनिधितव किया। कुल मिलाकर इन तीन खेवनहार ने 32 वर्ष का शासन किया। इस चुनाव में जो सिथति बन रहीं है, उससे एक बात साफ हो गयी है कि इस बार भी इन्ही तीन में से कोई एक समस्तीपुर का सांसद होगा। इसका मतलब है की हम इन तीन खेवनहार के बदौलत बीच मझंधार में हमेशा फंसे ही रहेंगे।

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