पटनाः एनडीए में सीटों का बंटबारा- महागठबंधन में संग्राम

रविवार को जदयू प्रदेश कार्यलय में एनडीए की संयुक्त पीसी हुई। जिसमें जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने एनडीए में सीट बंटवारे की घोषणा की। किए गए घोषणा के अनुसार बीजेपी 17, जदयू 17 और लोजपा 6 सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ेगी।

बीजेपी के लिए
शिवहर, मधुबनी, बेगूसराय, अररिया, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, औरंगाबाद, पं. चंपारण, पूर्वी चंपारण, पटना साहिब, पाटलीपुत्र, महाराजगंज, सारण, दरभंगा, सासाराम, उजियारपुर से लोकसभा चुनाव लड़ेंगी ।
जदयू के लिए
पूर्णिया , किशनगंज, नालंदा, कारकाट, मधेपुर, सुपौल, गया, सीतामढ़ी, वाल्मिकी नगर, भागलपुर, कटिहार, झंझारपुर, बांका, सिवान से चुनाव लड़ेगी।
लोजपा के लिए
हाजीपुर, समस्तीपुर, खगड़िया, जमुई और नवाद लोकसभा सीटों पर अपनी उम्मीदवारों को उतारेगी।
बीजेपी, लोजपा एवं जदयू के बीच सीट बंटबारे के बाद एक बात साफ हो गया है कि अब एनडीए में किसी भी दल को जगह नहीं मिल सकेगी।
ऐसे में महागठबंधन में यदि सीटों के बंटबारे को लेकर सिर फुटौव्वल होती है तो एनडीए को इसका परोक्ष फायदा हो सकता है। राजद 18 सीट से कम पर तैयार नहीं है, जबकि कांग्रेस को 11 से कम मंजूर नहीं है। रालोसपा को न्यूनतम चार एवं अधिकतम 6 की डिमांड है। मुकेश सहनी को न्यूनतम दो अधिकतम चार चाहिए। मांझी को रालोसपा से एक अधिक चाहिए। शरद यादव को कम से कम तीन सीट चाहिए। इधर कांग्रेस के सहारे पप्पू के लिए रंजीता पूर्णिया या मधेपुरा में से एक सीट चाहती है। जबकि राजद चाहता है कि वामदल को भी गठबंधन का हिस्सा बना कर चुनाव लड़ा जाय। वामदल में तीन दल हैं ऐसे में संग्राम की स्थिति बन रहीं हैं।यहाॅं हम कह सकते है कि महागठबंधन में अभी संग्राम चल रहा हैं । राजद के पास ठोस जनाधार है। जबकि कांग्रेस को यह समझाया जा रहा है कि राजद को छोड़कर हम सभी एक होकर लड़ लें। यदि ऐसा हुआ तो इसका फायदा एनडीए को हो सकता है।

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