मुजफ्फरपुरःएनडीए के मजबूत किले को ध्वस्त कर सकेगा महागठबंधन?

मुजफ्फरपुर संसदीय क्षेत्र में एनडीए का मजबूत किला हैं इसे महागठबंधन ध्वस्त कर सकेगा या नहीं? यह तो आने वाला चुनाव परिणाम बतायेगा। लेकिन राजनीतिक चर्चा शुरू हो गयी है। एनडीए ने दुबारे बीजेपी के अजय निषाद पर ही दाव लगाया है। जबकि कांग्रेस ने पिछले चुनाव में परास्त हुये अखिलेश प्रसाद सिंह के बदले यह सीट अपने सहयोगी सन आॅफ मल्लाह की पार्टी वीआईपी को दे दी है। इस सीट से कांग्रेस समर्थित वीआईपी उम्मीदवार डाॅ राज भूषण चैधरी उम्मीदवार बने है। वे पहली बार चुनाव लड़ रहे है। जबकि अजय निषाद को राजनीति विरासत में मिली है। वे वर्तमान में सांसद भी है। वैसे मुजफ्फरपुर की जनता के बीच कई प्रकार के मुद्दे है। मुजफ्फरपुर लोकसभा सीट पर 2014 में हुए चुनाव में बीजेपी के अजय निषाद जीते। अजय निषाद को 4,69,295 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस के अखिलेश प्रसाद सिंह जिन्हें 2,46,873 वोट मिले थे। जेडीयू के बीजेंद्र चौधरी 85,140 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे। इससे पहले 2009 के चुनाव में कैप्टन जयनारायण प्रसाद निषाद ने जेडीयू के टिकट पर यहां से चुनाव जीता था। इस सीट पर वोटरों की संख्या 13,39,949 है।             
1952 से 1971, दो दशकों तक मुजफ्फरपुर संसदीय क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ रहा। चेहरा कोई भी, जीत कांग्रेस की हुई। 1952 व 1957 में कांग्रेस नेता श्यामनंदन सहाय सांसद चुने गए। लेकिन, 1957 में विजयी होने के तत्काल बाद उनका निधन हो गया। तब उपचुनाव में एके मेहता सांसद बने। उसके बाद लगातार दो बार दिग्विजय नारायण सिंह यहां के सांसद बने। 1971 में कांग्रेस के नवल किशोर सिन्हा सांसद बने। लेकिन, इमरजेंसी लागू होने के बाद लोहिया और जेपी का प्रभाव बढ़ने से यह क्षेत्र समाजवादियों का अभेद किला बन गया। 77 में जेपी की पहल पर मुंबई के श्रमिक नेता जाॅर्ज फर्नांडिस को उतारा गया। उस वक्त वे जेल में थे। लेकिन, कांग्रेस के खिलाफ ऐसी लहर थी कि उन्हें देखे बिना ही मतदाताओं ने भरोसा जताया। पहली बार कांग्रेस को शिकस्त मिली और जाॅर्ज जनता पार्टी से सांसद बने। उसके बाद वे 1980, 1989, 1991 व 2004, यानि 5 बार सांसद रहे। 1984 में कांग्रेस के ललितेश्वर प्र. शाही को छोड़ दें तो फिर कै.जयनारायण प्रसाद निषाद ही जीते। इस दौरान अलग-अलग चुनावों में जाॅर्ज ने जनता पार्टी, लोकदल, जनता दल, जदयू तो कैप्टन निषाद ने जनता दल, राजद और जदयू का दामन थामा। लेकिन, क्षेत्र की जनता ने इन्हीं चेहरों को तरजीह दी। गत चुनाव में कै. निषाद की विरासत उनके बेटे अजय निषाद ने संभाली और मोदी लहर में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते। इस तरह से निषाद और उनके बेटे ने भी 5 बार इस सीट पर कब्जा जमाया। इस चुनाव में बिहार में एनडीए में नीतीश कुमार की पार्टी जदयू, राम विलास पासवान की पार्टी लोजपातथा बीजेपी शामिल है। जबकि महागठबंधन में कांग्रेस, राजद, हम, रालोसपा एवं वीआईपी पार्टी शामिल है।

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