बिहारः नल जल योजना से लोगों को नहीं मिल पा रहा है पानी

         

कमीशन की रकम में बराबर की हिस्सेदारी है अफसर एवं जनप्रतिनिधियों की
मुखिया एवं वार्ड सदस्य को मिलती है दस-दस प्रतिशत, जबकि अधिकारी लेते है 20 प्रतिशत
बिहार में सीएम नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी योजना की हवा निकल गयी है। लाखों रूपये वार्ड वाईज खर्च करने के बाद भी सात निश्चय योजना के तहत पंचायतों के वार्ड में नल जल योजना हाथी के दांत की तरह दिख रहे है। कमीशन खोरी ऐसी की आधी रकम अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधि के बीच बंट जाती है। शेष रकम से कार्य को कार्य रूप दिया जाता है। पीने के पानी के लिए एक तरफ हाहाकार मचा हुआ है तो दुसरी तरफ वार्ड सदस्य एवं मुखिया की मिलीभगत से खेतों का पटवन का कार्य किया जा रहा है। वह भी पैसे लेकर। यह कहावत किसी एक गांव की नहीं है बल्कि यह पूरे बिहार की कहानी हैं बता दें कि नल जल योजना में घरों तक पानी पहुॅंचाना है। वार्ड सदस्य की निगरानी में प्रबंधन समिति द्वारा योजना का क्रियान्वयन किया जाना है। 14 लाख की योजना में 10 प्रतिशत की रकम प्रबंधन समिति बतौर कमीशन ले रहीं है। इसमें से केवल वार्ड सदस्य को 7 प्रतिशत मिल रहा है।

दस प्रतिशत की राशि मुखिया तथा पंचायत सचिव ले रहे है। योजना का एम बी बुक करने के नाम पर जेई स्तर से 10 प्रतिशत तथा 2 प्रतिशत करके बीडीओ, डीडीसी स्तर तक का कमीशन फिक्स है। योजना का बरा न्यारा होने के बाद योजना की पाईपें ऐसी लगायी जा रहीं है कि दस दिन भी नहीं चल पा रहा है। बोरिंग गड़ाई से लेकर पानी निकालाने तक का कार्य होने के बाद घरों तक पानी पहुॅंचाने के बदल वार्ड सदस्य एवं मुखिया की मिली भगत से 100 से 150 रूपये प्रति घंटा पटवन का कार्य कर अपनी जेब भरने का कार्य किया जा रहा है। समस्तीपुर, दरभंगा, बेगूसराय ही नहीं बल्कि  बिहार में इस योजना की हवा निकल गयी है। लेकिन अधिकारियों की जूं तक नहीं हिल रहीं है क्योकि वे भी इस कमीशन खोरी में बराबर के हिस्सेदार है।

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