उजियारपुरः दो अध्यक्षों के साख का है सवाल ?

उजियारपुर संसदीय सीट दो अध्यक्षों के साख की सीट बन गयी है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानन्द राय एवं रालोसपा सुप्रीमो उपेन्द्र कुशवाहा के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई के कारण इस सीट को जीतने के सारे हथकंडे अपनाये जा रहे है। एक तरफ बीजेपी किसी भी कीमत में इस सीट को हारना नहीं चाहती है। वहीं दूसरी ओर रालोसपा इस सीट की बदौलत दिल्ली तक अपना क्रेज बरकरार रखना चाहती है। बीजेपी को इस सीट पर जदयू के संगठन की आस है। वहीं रालोसपा को राजद एवं कांग्रेस के संगठन की आस है। उजियारपुर सीट हारने पर उपेन्द्र कुशवाहा को अपनी पार्टी का वजूद बचा पाना मुश्किल होगा। ऐसे में कुशवाहा इस सीट को जीतने के लिए एड़ी चोटी का जोड़ लगा रहे है। अब सवाल उठता है कि कुशवाहा की जीत में हिस्सेदार बन रहीं राजद, कांग्रेस के कार्यकर्ता कुशवाहा के लिए दिल से काम कर रहे है या नहीं? दूसरी ओर जदयू इस सीट को एक बार जीत चुकी है। एक बार बीजेपी भी इस सीट को जीत चुकी है। ऐसे में तीसरी बार इस सीट का प्रतिनिधित्व कौन करेगा? बड़ा सवाल है , क्योंकि यह सीट अपने सांसद को बदलने के लिए जानी जाती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि नित्यानन्द राय के कार्यकाल को लेकर जनता के बीच सवाल तो अवश्य है। लेकिन कुशवाहा के लिए भी जनता सवाल कर रहीं है। ऐसे में एक तरफ मोदी की सत्ता की चासनी में डुबे रहने वाले कुशवाहा आज मोदी के प्रबल विरोध कर चुनाव जीतना चाहती है, दूसरी ओर बीजेपी अपने प्रदेश अध्यक्ष को मोदी के नाम पर जीताना चाहते है। दोनों नेताओं का इस क्षेत्र पर व्यक्तिगत प्रभाव भी है। ऐसे में आखिर किसकी साख बच पाती है…. यह तो 23 मई को पता चलेगा….!

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