सामान्य सीट पर जाति-जाति व आरक्षित सीट पर भगवान भरोसे…!

बिहार में दो चरणों के समाप्त हुये चुनाव में एक बात सामने आया है। संसदीय सीट में वैसी सीटें जो आरक्षित है वहाॅं वोटर व उम्मीदवार भगवान भरोसे चुनाव की जीत हार की बातें कर रहे है। क्योंकि इस सीट पर सामान्य वर्ग के वोटर का उत्साह ना के बराबर है। वे किसी की जीत या हार से ना तो अधिक उत्साहित है और ना ही अधिक मायूस। इसी प्रकार जो सीट सामान्य है। वहाॅं जाति जाति का कार्ड खेला जा रहा हैं शीर्ष नेता के आधार पर राजपूत, बाह्राण इधर, यादव मुसलमान उधर, दलितों में पासवान इधर तो बातर उधर, मल्लाह, कुशवाहा इधर तो कुर्मी, नेानिया उधर, भूमिहार इधर तो बनिया उधर…! यह सुनकर लगता है कि यह चुनाव नहीं समाज को दो भागों में बांटने का चल रहा है खेल। मीडिया भी धर्म व जाति के नाम पर पहचान कायम करने में जुटा है कि आखिर कौन से मतदाता किस को वोट कर रहे है। आखिर बिहार में वर्ष 1967 से चला आ रहा जाति व्यवस्था कब ध्वस्त होगा कह पाना मुश्किल है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *