सवर्ण आरक्षण विरोध के कारण डूब गयी राजद की लुटिया

बिहार में तकरीबन तीन दशक से पक्ष विपक्ष में रहने वाली क्षेत्रीय पार्टी राजद की इस लोकसभा चुनाव में करारी हार हुई है। इस हार का कारण सवर्ण आरक्षण विरोध को माना जा रहा है। बिहार के सभी क्षेत्रों में सवर्ण मतदाताओं की संख्या है। राजद के गरीब सवर्ण आरखण विरोध के कारण इन मतदाताओं में आक्रोश था। उन्होंने अपने अन्दर के विरोध को अंडर करैन्ट का रूप दिया। मतदान किया और लालू के कुनबे को चारों खाने चित कर दिया। हार का दुयरा कारण था वीआईपी , हम जैसी पार्टी को तीन तीन सीट दे देना। आधे दर्जन सीट को गठबंधन के तहत राजद ने कमजोर कर दिया। खगडिया में कृष्णा यादव को टिकट दिया जाता तो इसका प्रभाव खगडिंया, मु्रगेर एवं बेगूसराय में देखने को मिलता। मुजफ्फरपुर में कांग्रेस के अखिलेश सिंह को दिया जाता तो इसका प्रभाव सीतामढ़ी में देखने को मिलता। बेगूसराय के रहने वाले डाॅ राजभूषण चोधरी को खगड़िया सीट से टिकट दिया जाता तो संभावना बन सकती थी। यहज्ञॅं से मुकेया सहनी जो दरभंगा के रहने वाले है। उन्हें दे दिया गया। समस्तीपुर से राजद नेता को टिकट दिया जाता और दरभंगा से कीर्ति आजाद को तो समीकरण कुछ और ही रहता। मुगेर में शुरू से यदि अनंत सिंह के नाम पर राजद विरोध का स्वर नहीं उठाता तो अनंत सिंह की पत्नी की जीत हो सकती थी। पप्पू को मिला कर राजद पूर्णिया सीट जीत सकती थी। इसी प्रकार रंजीता रंजन को राजद कार्यकर्ताओं ने ही हरा दिया। चंद्रिका राय को दोनों भाईयों के बीच समन्वय नहीं रहने के कारण हार का सामना करना पड़ा। मधुबनी से कांग्रेयस ने शकील अहमद का अिक्ट काट कर अपने पैर में कुलहारी मार ली। किशंनगंज की सीट औवेसी को ना देकर राजद ने गुस्ताखी की। आनन्द मोहन की पत्नी लवली आनन्द कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहती थी। उसे टिकट ना देकर जीतन राम मांझी को तीन सीट देकर तीनों सीट को मटियामेट कर डाला। रालोसपा में उपेन्द्र कुशवाहा को एक सीट के बदले दो सीट पर चुनाव लड़वाकर दोनों को हार दिलवाना, आलोक मेहता को उजियारपुर से टिकट मिलता तब तस्वीर कुछ और होती। रालोसपा के बदले कांग्रेस को दो सीट और मिलनी चाहिए थी। वामदल को बेगूसराय सीट देकर कनहैया कुमार से बिहार में प्रचार करवाने का फार्मूला भी फिट बैठता। ऐसे कई गलतियों के कारण राजद की पराजय हुई है। इसमें आप कह सकते है की अभी तेजस्वी में राजनीतिक सोच तो बए़ी है। लेकिन गंभीरता का अभाव रहा है।

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