क्या संभव है बिहार में तेजस्वी की बदौलत राजद की सत्ता वापसी ?

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संपादक संजीव कुमार सिंह की खास रिपोर्ट
बिहार में वर्षो तक सत्ता का एक ध्रुव बनकर रहने वाली राजद इन दिनों हत्तोत्साहित नजर आ रहीं है। इस हताशा से तेजस्वी राजद को उबार सकेगा? तेजस्वी की बदौलत राजद सत्ता में वापस लौट सकेगी? ऐसे कई सवाल आज राजद के स्थापना दिवस पर संगठन के बीच उमड़ती घुमड़ती रहीं। सवाल के बीच जबाब भी खोजे जाते रहे। लेकिन मेरा मानना है कि यदि तेजस्वी को दरकिनार कर दिया गया तो राजद का बेसिक वोट एमवाई का सर्वनाश होना संभव है। क्योंकि आज भी एमवाई समीकरण की बदौलत ही राजद ने बिहार में लोकसभा के चुनाव में 55 लाख वोट हासिल किये है। इसके बाद भी लोकसभा में एक भी एमपी नहीं जीताकर भेज पाने का दर्द है। लेकिन आज भी बिहार में राजद मजबूती के साथ इस लिए सत्ता वापसी कर सकता है क्योंकि उसके पास आज भी 80 विधायक है। जो एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभा रहा है। हाॅं एक बात अवश्य है लालू के समय एवं तेजस्वी के समय में जनता की मानसिकता में काफी परिवर्तन हुआ है। प्रायः सभी वर्ग को जातिवाद के बदले विकास अच्छे लगने लगे है। सबसे आश्चर्यजनक पहलू यह है कि जिस लोकलुभावन वादे पर कांग्रेस ने वर्षो राज किया था, उसी पर वर्तमान समय में जदयू एवं बीजेपी भी अमल कर रहीं है। जैसे आज भेदभाव मिटाकर सभी वर्गो के वृद्धों को वृद्धावस्था पेंशन, किसान सम्मान के नाम पर सलाना 8000 की राशि, कन्या विवाह योजना, कबीर अन्त्येष्ठिी योजना, छात्र क्रेडिट कार्ड योजना, पोशाक योजना, साईकिल योजना, छात्रवृति योजना, अन्त्योदय योजना, शौचालय निर्माण की राशि, प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि पांच गुणी करने जैसे अनगिनत लाभकारी योजनाएं लांच की गयी है। जिससे राजद से मोह भंग होना लाजमी है। ऐसे में राजद को अपने पुराने तेवर को बरकरार रखने के लिए अपने पार्टी के एजेंडे को जानकारों से एक बार फिर से संवारने की जरूरत है। अगड़ा बनाम पिछड़ा की राजनीति का समय अब समाप्त हो चुका है। इसलिए इस नारे पर वह वोट तो पा सकता है लेकिन सत्ता वापसी संभव नहीं है। पुराने नेताओं की बदौलत भी वापसी संभव नहीं है। राजद जिस यादव नेताओं की बदौलत बिहार में शासन किया उसमें से दर्जनभर से अधिक नेता आज बीजेपी एवं जदयू में सांसद या विधायक बन चुके है। तेजसवी में नेतृत्व करने की क्षमता है, लेकिन इस क्षमता को उनके पार्टी के वरीय नेता कुचलना चाहते है। महत्वाकांक्षा के कारण अब वरीय नेताओं के बदौलत राजद की वापसी संभव नहीं है। नये, नौजवान एवं जानकार बेबाक लोगों को संगठन में लाने बाद एक नई राजद की लकीर ही अगली विधानसभा चुनाव में पार्टी के गिरते वर्चस्व को फिर से आगे ला सकेगी। लेकिन इसमें लालू परिवार के सभी सदस्य को तेजस्वी का साथ देना होगा अन्यथा लालू की मेहनत से बनी पार्टी में भयंकर टूट होगा । इस टूट के बाद पक्ष व विपक्ष बीजेपी एंव जदयू ही हो जायेगा और राजद जैसी पार्टी के अधिकांश नेता बीजेपी एंव जदयू का दामन थामने को विवश हो जायेंगे। जबकि बिहार में आज भी तेजस्वी को चाहने वाले की कमी नहीं है। राजद के प्रति आज भी पिछड़ा वर्ग का प्रेम झलक रहा है। लेकिन आपस में तालमेल का अभाव राजद की लुटिया डूबोने में 100 प्रतिशत कारगर हुआ है जिसे आपसी तालमेल से ही पाटा जा सकता है। जरूरत है पार्टी को फिर से संवारने का।

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