सांप्रदायिक सौहार्द के नाम पर अभिव्यक्ति की आजादी पर लगाम लगाना चाहती है प्रशासन

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अखबार एवं न्यूज चैनल पर सरकार के पक्ष में खबर चलाकर मीडिया ने अपना विश्वास खोने के बाद आम जनमानस की आवाज बन चुकी सोशल मीडिया पर भी प्रतिबंध लगाने की गहरी साजिश चल रहीं है।इसे प्रतिबंधित करने के लिए सरकार द्वारा प्रशासन का सहयोग लिया जा रहा है। इसे सांप्रदायिकता का नाम देकर इसे प्रतिबंधित करने का नया ईरादा सामने आने लगा है। जो अभिव्यक्ति की आजादी पर कुठाराघात से कम नहीं है। इन दिनों सोशल साईट पर विभिन्न समाज सेवी एवं आम जनमानस के द्वारा वैसी घटनाओं को पोस्ट करने का सिलसिला चल पड़ा है जो सामान्यतः अखबार एवं न्यूज चैनल पर चलने लायक नहीं मानी जाती है। या चैनल वाले इसे चलाना ही नहीं चाहते है। क्योंकि इससे उनका मनमाफिक विज्ञापन रूकने का भय रहता है। लेकिन वहीं खबर जब सोशल मीडिया पर वायरल कर दी जाती है तो चैनल वाले से लेकर अखबार वाले इन खबरों के पीदे भाग म भाग करने से वाज नहीं आते है। लेकिन सरकार का रवैया सोशल मीडिया को लेकर बेहद ही साजिश पूर्ण है। इसे बंद करने में असक्षम सरकार एवं प्रशासन इस पर अघोषित प्रतिबंध लगाने का पूरा इंतजाम कर चुकी है। तभी तो सोशल मीडिया के पोस्ट पर मुकदमा कर पुलिस वैसे लोगों को तत्क्षण गिरफ्तार भी करने लगी है। आखिर भारतीय संवधान में अभिव्यक्ति की आजादी दी गयी है। इसे रोकने का प्रयास करने वाली सरकार चाहती क्या है? आखिर आम जनमानस की आवाज को दबाने का प्रयास क्यों किया जा रहा है। इस ओर आम जनमानस में घोर आक्रोश है।

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