क्या सचमुच बिहार बदल रहा हैः गुटखा बंद है या बिक रहा है…!

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बिहार की मौजूदा सरकार का एक से बढ़कर एक फरमान इन दिनों आम जनता को हजम नहीं हो रहा है। ऐसे ही फरमानों में से एक है गुटखा बंदी का फरमान। यह ऐसा फरमान है, जो सरकार के स्तर से 1 सितम्बर 2019 से बिहार में लागू हो चुका है। इसे बेचने वाले दुकानदार को जुर्माना भरना पड़ रहा है। फैसला अच्छा है, लेकिन फैसले के अनुसार बिहार में कार्य नहीं होते है। इसलिए गुटखा बिक रहा है। लेकिन अपने निर्धारित मूल्य से अधिक मूल्य पर, वह भी सरेआम। ऐसे में आप कह सकते है की बिहार की सरकार केवल कागजी खानापूर्ति कर रही है और कालाबाजारियों की मदद कर रहीं है। कालाबाजारियों के द्वारा सरकार के हर कदम का हल है, वह गुटखा को एकत्रित कर खुदरा दुकानदारों को इसकी खेप बेच रहे है, लेकिन इसके एवज में वे अब दुकानदार के बेचने वाले मूल्य पर इसे दुकानदार को उपलब्ध करवा रहे है। ऐसे में दुकानदार इसे दोगुणे कीमत लेकर आम जनता या कहें इसे शौकीन लोगों को बेच रहे है। ऐसे में सरकार की घोषणा और फरमान का कोई असर नहीं हो रहा है।

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