काश! प्रतिबंधित सामानों की ब्रिकी पर सचमुच लग जाता प्रतिबंध….!

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बिहार में बहार है। यह नारा सचमुच हिट हो गया है। लेकिन इस नारे का स्वरूप बदल गया है। बिहार में कई वस्तुएं प्रतिबंधित हो चुकी है। लेकिन यह खुलेआम बिक रहीं है। जैसे शराब की बिक्री पिछले चार सालों से बंद है। लेकिन वह हर गांव के चैक चैराहों पर आसानी से मिल रही है। पीनेवालों को पता है कि शराब कहाॅं मिलती है। कितने पैसे देने होते है। पुलिस को भी मालूम है कि किस गांव में कौन शराब बेच रहा है। कब शराब उतारी जा रही है। लेकिन शराब की बरामदगी होती है। बाहरी लोग पकड़े जाते है, लेकिन जो शराब की खेप मंगवाता है, उसे पुलिस भगा देती है। क्योंकि उससे हर माह की आमदनी जो होती है। इसी प्रकार गुटखा बंद है। लेकिन हर पान दुकान में यह बिक रहीं है। बश इसकी कीमत अधिक हो गयी है। पालीथीन बंद है। लेकिन आज भी चीनी इसी में दुकानदार दिया करते है। विद्यालय के बगल में पान की दुकानें खोलने की मनाही है। अधिकांश दुकान विद्यालय के बगल में ही है। लाउडस्पीकर बजानी बंद है। मंदिरों पर दो तो मस्जिदां पर फुल साउण्ड में यह बजती है। कोंचिंग एक्ट लागू है। सैकड़ों कोचिंग संस्थान बेरोक ठोक चल रहे है। मोटर अधिनियम के तहत परिचालन के लिए चालक को लाईसेंस, गाड़ी के कागजात, बीमा आदि होना आवश्यक है। सरकार को पता है कि निबंधित वाहनों की संख्या कितनी है। और कितने वाहन का बीमा हुआ है। अब आप समझ गये होंगे की बिहार में बहार है प्रतिबंधित सामानों की ब्रिकी सरेआम है।

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