बिहार में हर दल में भगदड़ की संभावना के बीच राजनीति

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सूबे में विधानसभा चुनाव के अब दस महीने बच गये है। हर दल में नेतृत्व को लेकर उहा पोह है। भगदड़ तो हर दल में मचेगी। लेकिन इस भगदड़ क बीच बिहार की राजनीति के भी करवट लेने की संभावना है। ऐसे में आईना समस्तीपुर मासिक पत्रिका के संपादक संजीव कुमार सिंह आपको वर्तमान स्थिति के बारे में बता रहे है।
बीजेपी
इसमें दो गुट बन गये है। एक गुट सुशील मोदी के सहारे तो दुसरा गुट गिरीराज सिंह के साथ दिख रहा है। हांलाकि प्रदेश अध्यक्ष बाहा्रण या भूमिहार को बनाने के संभावना को इसलिए केन्दीय नेतृत्व ने टाल दिया क्योंकि एक गुट इसका पुरजोर विरोध कर रहा था। वैसे कहा जा सकता है कि इसमें सुशील मोदी की ही चली। फैक्टर दो के अन्तगर्त बिहार बीजेपी का एक गुट नीतीश कुमार से अलग होना चाह रहा है। जबकि दुसरा गुट नीतीश के नेतृत्व में ही अगला विधानसभा चुनाव लड़ना चाह रहा है। ऐसे में यदि नीतीश कुमार से बीजेपी समर्थन वापस लेती है तो पार्टी में टूट के बीच जदयू मजबूत होगा। लेकिन झारखंड में जदयू के अलग चुनाव लड़ने को लेकर बीजेपी भी जदयू से निराश चल रहीं है।
राजद
राजद में भी तेजस्वी यादव के विरोध में तकरीबन बीस विधायक नीतीश कुमार के साथ जाने के लिए तैयार बैठे है, जबकि बीस विधायक बीजेपी से हाथ मिलाकर सत्ता में आने के लिए तेजसवी पर दबाब दे रहे है। राजनीतिक हल्कों में चर्चा की मानें तो नीतीश कुमार बीजेपी के समर्थन वापसी के ऐन मौके पर या तो बीजेपी को तोड़कर या फिर राजद को तोड़कर सत्ता में बने रहना चाहते है। वर्तमान में लालू प्रसाद यादव जेल में है औश्र तेजस्वी एवं तेजप्रताप के रौल से पार्टी के वरीय लोग नाराज है।
कांग्रेस
कांग्रेस के विधायक के पास भी अपनी सीट बचाने के लिए राजद या नीतीश के सहारे की तलब है। ऐसे में कांग्रेस के विधायक भी अपने क्षेत्र के हिसाब से खेमा बदलने के मूड में है। एक बात अवश्य है की वे चाहते है की नीतीश के साथ यदि उन्हें टिकट की गारन्टी मिले तब वे पाला बदल सकते है।
जदयू
पार्टी के सांसद बने लोग चाहते है की केन्द्र की सत्ता में हम बीजेपी के साथ है, लेकिन मंत्री पद नहीं रहने के कारण केन्द्र की सत्ता में रहकर भी वे अपने को बेताज दिख रहे है। उनका कहना है की बिहार में नीतीश जी सत्ता में है जबकि केन्द्र में बाहर से समर्थन कोई तुक की बात नहीं है। नीतीश कुमार का यह फैसला उन्हें गले नहीं उतर रहा है। इन लोगों का मानना है की यदि विधानसभा में जदयू को अधिक सीअें किसी कारणवश नहंी मिली तो वे ना तो घर के रह पायेंगे और ना ही घाट के ।
लोजपा
पार्टी में कार्यकर्ताओं की अहमियत नहीं रहने तथा रामविलास पासवान के परिवार को ही सत्ता की मलाई मिलने के कारण पार्टी का बिहार ईकाई के अधिकांश सदस्य सामूहिक रूप से जदयू की सदस्यता लेना चाह रहे है। उन्हें केवल बारह सीटों पर टिकट की गारंटी नीतीश कुमार से मिल जाय।
रालोसपा, हम, जन अधिकार पार्टी एवं वीआईपी पार्टी के कार्यकर्ता कभी भी इधर से उधरहो सकते है। ऐसा राजनीतिक गलियारों में चर्चा है। हांलाकि यह राजनीतिक सूत्र के हवाले से खबर दी जा रहीं है। ऐसे में आप कह सकते है की बिहार में जल्द ही भगदड़ की सिथति मचने वाली है। कब किस पार्टी में टूट की खबर मिल जाय कहना मुश्किल है। लेखक राजनीतिक मामले के जानकार है और सभी दलों में समसामयिक स्थिति के बारे में जानकारी रखते आ रहे है।

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