बिहारः कमीशन के खेल में नल से नहीं निकल रहा है जल, इसे कहते है घर घर महत्वाकांक्षी नल-जल योजना

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Description

बिहार में हर घर नल का जल पहुॅंचाने को आरम्भ हुई नल जल योजना दांत निपोड़ रहीं है। कमीशन के खेल में नल से जल नहीं निकल रहा है। कमीशन भी ऐसा की मानों भाईयों में बंटबारा हो रहा है। योजना में वार्ड सदस्य एवं ग्राम पंचायत सचिव का कमीशन बराबर का है। मुखिया जी एवं प्रबंध समिति का कमीशन भी बराबर का है। इन सबों में 25 प्रतिशत की राशि बंट जाती है। शेष बची राशि में बीडीओ, जेई एवं अन्य का कमीशन तकरीबन 20 प्रतिशत तक है। कुल मिलाकर 40 से 45 प्रतिशत तक की राशि बतौर कमीशन बांटने के बाद जब नल का जल निकलने लगता है तो बपौटी संपति समझ कर वार्ड सदस्य इससे पटवन करते है। इससे मिलने वाली राशि से एक तरफ जहाॅं वार्ड सदस्य की चांदी ही चांदी है वहीं बिजली का बिल सरकार भरती है। सरकार के मापदंड से अलग नल जल योजना को जैसे तैसे गाड़ने वाले विभिन्न पंचायतों के वार्ड पर कोई फर्क नहीं पड़ता है क्योंकि जिन अधिकारियों ने कमीशन ली है उन्हीं के अन्दर जांच है। ऐसे में जांच रिपेार्ट में सबकुछ ठीक ठाक लिखना उनकी मजबूरी है। अरबों रूपये की यह योजना गलत प्रबंधन के कारण बरबाद हो रहा है। कोई इस पैसे से गाड़े गये नल का जल पटवन के कार्य में लगा कर खेती कर रहा है कोई इसे घर घर लगाकर उगाही कर रहा ळै लेकिन सरकार के पास वसूले गये रूपयों का कोई हिसाब किताब नहीं है। जबकि बिजली के बिल तकरीबन करोड़ों में आ गये है। आखिर यह बिल कौन भरेगा। यदि सरकार भरती है तो है ना यह बेजौड़ योजना। माल मिर्जा के महाराजा खेले होली….. की तर्ज पर पंचायती राज में कमाओ खाओ स्कीम की तरह है नल जल योजना। ना पाईप गाड़ने का पैमाना, ना ही पानी पीने योग्य है या नहीं। ना पानी घर तक पहुॅंचाने के बाद मासिक की वसूली करने के बाद सरकारी खाते में राशि के जमा करने आदि आदि ऐसे कितने अनियमितता से भरा पड़ा है यह योजना। सीएम नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी योजना का हश्र इतना बुरा है। इसके बावजूद यह योजना सात निश्चय योजना में शुमार है। बोरिंग के पाईप बिक गये, ोरिंग 80 फीट पर गड़ गये। तीन फीट तले से गुजरने वाली पाईप जमीन के उपर से ही ले जाया गया। टंकी दस हजार लीटर की जगह पांच हजार लीटर के ही लगाये गये। दो नम्बर वाली ईट से ही घर बना दिया गया। कोई देखने वाला नहीं । जनता की राशि लूअ रहीं है। कोई एजेंसी नहीं है जो इन राशि को बंदरबांट से रोक सके। केन्द्र एवं राज्य सरकयदि इसकी जांच निगरानी से करवा दें तो सूबे के हजारों लोग जेल की सलाखों में होंगे। लूट खसोट का यह आलम ऐसा है जो जनता का मुहॅं चिढ़ा रहा है लेकिन जनता बेबस है…..।

 

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