अयोध्याः फैसले से न्यायालय पर बढ़ा लोगों का भरोसा…!

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।।संपादक संजीव कुमार सिंह की खास खबर।।
वर्षो से चल रहे आंतरिक संकटों में से एक रामजन्म भूमि विवाद का फैसला सुनाकर न्यायालय ने एक भरोसे वाला काम अवश्य किया है। न्यायालय पर से उठ रहे भरोसे को एक बार फिर न्यायालय की पंच सदस्यीय पीठ ने अचानक भरोसे में बदल दिया। इस फैसले को वर्षो पूर्व आ जाना चाहिए था। लेकिन वर्षो बाद भी इस फैसले ने अचानक लोगों का दिल जीत लिया। इस फैसले से धर्मनिरपेक्ष देश में भी एक खास समुदाय के धर्म का ख्याल रखने की कोशिश की गयी है। जबकि दुध का दुध व पानी का पानी कर दिया गया है।

क्या है न्यायालय का फैसला

न्यायालय ने निर्मोही अखाड़े की समूची विवादित जमीन पर दावे की याचिका को खारिज की।
न्यायालय ने केंद्र को मंदिर निर्माण के लिये तीन महीने में योजना तैयार करने और न्यास बनाने का निर्देश दिया।
न्यायालय ने मुसलमानों को नयी मस्जिद बनाने के लिये वैकल्पिक जमीन आवंटिक करने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवादित जमीन हिन्दुओं को मंदिर के लिए दी जाएगी।
बाबरी मस्जिद को नुकसान पहुंचाना कानून के खिलाफ था – न्यायालय।
हिंदू ये स्थापित करने में सफल रहे कि बाहरी बरामदे पर उनका कब्जा था र-   न्यायालय।
स्थल पर 1856-57 में लोहे की रेलिंग लगाई गई थी जो यह संकेत देते हैं कि हिंदू यहां पूजा करते रहे हैं – न्यायालय।
साक्ष्यों से पता चलता है कि मुसलमान मस्जिद में जुमे की नमाज अदा करते थे जो यह संकेत देता है कि उन्होंने यहां कब्जा नहीं खोया है र- न्यायालय।
हिंदुओं की यह अविवादित मान्यता है कि भगवान राम का जन्म गिराई गयी संरचना मं ही हुआ था र- न्यायालय।
हिंदू इस स्थान को भगवान राम की जन्मभूमि मानते हैं, यहां तक कि मुसलमान भी विवादित स्थल के बारे में यही कहते हैं- न्यायालय।
एएसआई यह नहीं बता पाया कि क्या मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी- न्यायालय।
एएसआई ने इस तथ्य को स्थापित किया कि गिराए गए ढांचे के नीचे मंदिर था – न्यायालय।
बुनियादी संरचना इस्लामिक ढांचा नहीं थी – न्यायालय।
बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी – न्यायालय।
न्यायालय ने कहा कि पुरातात्विक साक्ष्यों को महज राय बताना एएसआई के प्रति बहुत अन्याय होगा।
न्यायालय ने विवादित स्थल पर पुरातात्विक साक्ष्यों को महत्व दिया।
न्यायालय ने कहा, राम जन्मभूमि एक न्याय सम्मत व्यक्ति नहीं।
न्यायालय ने कहा कि निर्मोही अखाड़े की याचिका कानूनी समय सीमा के दायरे में नहीं, न ही वह रखरखाव या राम लला के उपासक।
न्यायालय अब पूजा के अधिकार के लिये गोपाल सिंह विशारद के दावे पर फैसला सुना रहा है।
न्यायालय ने कहा कि राजस्व रिकार्ड के अनुसार विवादित भूमि सरकारी है ।
न्यायालय ने सर्वसम्मति से शिया वक्फ बोर्ड की अपील खारिज की। शिया वक्फ बोर्ड का दावा विवादित ढांचे को लेकर था जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया।

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