दिल्ली चुनाव परिणामः आखिर प्यार से हारा नफरत !

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(संपादक संजीव कुमार सिंह)
दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्यार के सामने नफरत हार गया। एक तरफ दिल्ली चुनाव में आप के केजरीवाल केवल अपने काम को चुनाव प्रचार के दौरान बोलते देखे गये, जबकि केजरीवाल के विराध में खड़े अन्य पार्टियों में मुख्य बीजेपी शाहीन बाग का चर्चा करने से अपने को रोक नहीं पा रहा था। हिन्दू मुसलमान तक की बात करने से बीजेपी बाज नहीं आया। बीजेपी ने केजरीवाल की जीत को पाकिस्तान की जीत की संज्ञा भी चुनावी मंच से दे डाली। दिल्ली की जनता के बीच आखिर नफरत फैलाने का यह प्रयास बीजेपी को निराशा दे गया। बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा। केजरीवाल चुनाव में अपार बहुमत पाने में सफल रहे।
आप ने फ्री बिजली पानी देने का पीछले चुनाव में वादा किया था, उसे निभाया। काम करके दिखाया। बीजेपी ने केजरीवाल के फ्री में दिये जाने वाली बात को लेकर उसकी भत्सर्ना की और स्वयं अपने घोषणा पत्र में फ्री में आटा देने की बात से लेकर अन्य घोषणाएं कर डाली। केजरीवाल के सामने मनोज तिवारी सीएम पद के लायक नहीं थे। फिर भी मनोज तिवारी को बीजेपी अधिक तव्ज्जो देकर आगे करने में लगी रही । आप के जीतने पर सीएम केजरीवाल होंगे। लेकिन बीजेपी जीतती तो पैश्राशूट सीएम होते। इसलिए बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा। सबसे महत्वपूर्ण बिन्दु यह है की पिछली बार बीजेपी जिन सीटों पर हारी थी, उसका अन्तर दो सौ से दो हजार ही था। इस बार पांच हजार से लेकर बीस हजार तक है। ऐसे में बीजेपी द्वारा देशद्रोह एवं शाहीनबाग का मामला, सीएए, एनपीआर, एनसीआर, निर्भया केस, केजरीवाल पर व्यग्य,समेत कई कारण को उछालना ही हार का कारण बना है। एक बिन्दू यह है कि बीजेपी के साथ बिहार के सीएम एवं विपक्ष भी चुनाव में कूद कर चुनाव को और भी रोमांचक बना दिया।अब बिहार में यदि केजरीवाल प्रशांत किशोर को आगे कर राजनीति करें तो यह कोई अजीब सी बात नहीं होगी। हालांकि कहा जा रहा है कि केजरीवाल के प्यार के अंदाज के सामने बीजेपी की नफरत हार गयी।

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