कवियों ने काव्यों की बहा दी धारा, एक से बढ़कर एक प्रस्तुती

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Description

साहित्य संगम रोसड़ा के तत्वावधान में चिल्डेन्स एकेडमी स्कूल के प्रांगण में आयोजित मासिक कवि संगोष्ठी का उदघाटन पत्रकार संजीव कुमार सिंह ने की। अध्यक्षता प्रो0 प्रवीण कुमार प्रभंजन ने किया। संचालन कवि अनिरूद्ध झा दिवाकर एवं रामस्वरूप सहनी रोसड़ा ने संयुक्त रूप से की। संगोष्ठी में कवियों ने वसंत ऋतु के आगमन का स्वागत अपने काव्यों से किया। गीत, गजल, सोहर, लगनी, भाव- भंगिमा, हास्य, से दर्शकों का मन मुग्ध हो गया। पत्रकार संजीव कुमार सिंह ने संतान शीर्षक से पौधा एवं मानव का संतान दायित्व का अनुभव काव्य रूप में शेयर किया।कवि रामस्वरूप सहनी रोसड़ाई ने वसंत आ गया है यीर्षक से कड़क शीत ऋतु का बस अंत आ गया है। गुनगुनी धूप ले वसंत आ गया है। कवि अनिरूद्ध झा दिवाकर ने प्राणों की पिकी पुकार उठी तथा चन्द्रभूषण कुमार ने भीरहा होली पर अपने काव्य की प्रस्तुती की। प्रो0 उत्तम चन्द्र दास ने ीवन का मूल्य तथा गजलकार अवधेश्वर प्रसाद सिंह के द्वारा आ गया हूॅं देख मां तेरी शरण की प्रस्तुती से सभी झूम उठे। प्रो0 प्रवीण कुमार प्रभंजन के द्वारा कुछ गुनगुना तो लूं, साहित्य संदेश सुना तो लूं, तथा मोहन दीवाना के द्वारा होली का त्यौहार प्यारा है, सब मिल मौज मनाते है। त्रिलोकनाथ ब्रजभूषण के द्वारा हम छोड़ दिया मुफ्तखोरी में तथा ज्योती कुमारी ने एक शिव नचारी की प्रस्तुती की। इस दौैरान प्रो0 सुरेश कुमार यादव सुनील, सुरेश कुमार सहनी, तृप्तिनारायण झा, मनोज कुमार झा,मणिशंकर कुमार, गोविन्द माधव समेत अन्य थे।

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