तेजस्वी के  दाव में उलझ गयी है नीतीश की कुर्सी

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जंगलराज एवं सुशासन की लड़ाई तो लालू नीतीश की लड़ाई रही है। इससे सभी वाकिफ है। लेकिन इस बार का विधानसभा चुनाव की लड़ाई लालू नीतीश की लड़ाई नहीं बल्कि चाचा भतीजा की लड़ाई है। क्योंकि इस चुनाव में यदि महागठबंधन की जीत होती है तो मुख्यमंत्री लालू नहीं बल्कि तेजस्वी यादव होंगे। जबकि राजग की जीत होती है तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार होंगे। लेकिन इस लड़ाई में तेजस्वी यादव ने अपने चाचा नीतीश को उलझा कर रख दिया है। तेजस्वी का फेंका गया एक एक दाव नीतीश के लिए उलझन पैदा कर रहीं है। 15 साल के शासन काल में नीतीश कुमार जिसे सुशासन कह रहे है बिहार की जनता उसे मानने को तैयार नहीं है। लालू राबड़ी के जिस शासनकाल को नीतीश जंगलराज कह रहे है, उसे देखने वाले बुजूर्ग की अब अपने परिवार में भी चलती नहीं है। हर परिवार की बागडोर युवाओं के हाथ में है। युवा नेत्त्व विगत चुनाव में मोदी के साथ थे तो राजद का बिहार में खाता भी नहीं खुल सका था। लेकिन इस चुनाव में तेजस्वी का घोषणा पत्र ने जनमानस में जगह बना ली है।यदि यह जगह वोट में तब्दील हो गया तो बिहार में तख्तापलट होना तय है। यहाॅं आप कह सकते है कि तेजस्वी के दाव में उलझ गयी है नीतीश कुमार की कुर्सी। तेजस्वी का घोषणापत्र का जिक्र करें तो पता चलेगा कि वे सभी वैसे बिन्दुओं पर फोकस किया है जिससे बिहार की कुर्सी चलती है। बिहार में अस्सी प्रतिशत लोग कृषि कार्य में लगे है। महागठबंधन ने किसान ऋण एवं लगान की माफी की योजना को घोषणा पत्र में जगह दिया है। बिहार में संविदा आधारित नौकरी में कम मानदेय को लेकर हमेशा आन्दोलन होते रहे है। तेजस्वी यादव ने इन्हें मानदेय बढ़ाने एवं स्थायित्व की घोषणा की है। बिजली की दर में कमी। रोजगार 10 लाख पहली कैबिनेट मीटिंग के जरिये देने जैसे अनगिनत ऐसे पहलू है, जो जनता को भा रहे है। सभी वर्गो को साथ लेकर चलने की घोषणा बार बार मंचों से किया जाना। तेजस्वी की सभा में उमड़ रहीं भीड़ एवं उत्साह यदि वोट में बदल गयी तो सभी मीडिया आकलन की हवा निकल जायेगी। ऐसे में मेरा मानना है कि नीतीश कुमार की कुर्सी तेजस्वी के दाव में एक बार फिर फंस गयी है। आप भाषण का अंदाज देखिए, नीतीश कुमार लालू राबड़ी का डर देखा रहे है। आज का युवा नीतीश कुमार के कार्यकाल की खामियां निकाल रहीं है। ऐसे में बदलाव की ब्यार में बिहार की पक चुकी फसल कौन काट ले जाता है, यह फिलहाल तो बता पाना जल्दबाजी होगी, लेकिन प्रत्यक्ष दिख रहा अनुमान कह पाने से अपने को रोक नही पा रहा हूॅं।
प्रस्तुती – संजीव कुमार सिंह, संपादक आईना समस्तीपुर मासिक पत्रिका 9955644631

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