रोसड़ाः बीजेपी एवं महागठबंधन की लड़ाई को त्रिकोणीय बनाकर लोजपा ने चुनाव को रोमांचक बनाया

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संजीव कुमार सिंह, राजनीतिक समीक्षक संपादक आईना समस्तीपुर
रोसड़ा विधानसभा क्षेत्र में चुनाव का परिणाम चैकाने वाला हो सकता है। कांग्रेस की जीती सीट पर उम्मीदवार बदलने के बाद बीजेपी एवं महागइबंधन की लड़ाई आमने सामने माना जा रहा था। लेकिन चुनाव के अंतिम समय में लोजपा ने इस लड़ाई में धार देकर इसे त्रिकोणात्मक बना दिया है। रोसड़ा सीट जीतने के लिए लोजपा ने एक रणनीति के तहत जातिवादी कार्ड भी खेल दिया है। रोसड़ा से पांच बार विधायक रहने वाले स्व0 गजेन्द्र प्रसाद सिंह की पत्नी डा0 उर्मिला सिन्हा को वारिसनगर सीट से टिकट देकर लोजपा ने उनके समर्थकों का विश्वास जीतने का प्रयास किया है। जबकि विभूतिपुर से भूमिहार नेता चन्द्रबली ठाकुर को टिकट देकर रोसड़ा क्षेत्र के ब्राहणों का विश्वास जीतने का एक प्रयास किया है। इसी प्रकार रोसड़ा नगर में सहनी बहुल वोटरों से मनीष सहनी को हसनपुर विधानसभा सीट से टिकट देकर रोसड़ा सीट जीतने की एक रणनीति अवश्य बना डाली है। इस रणनीति का असर देखने को यह मिल रहा है कि अब क्षेत्र में लोजपा भी इस आमने सामने की लड़ाई को त्रिकरेणा बनाने में लगी है। आमने सामने की लड़ाई में वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में जदयू बीजेपी गठबंधन एवं कांग्रेस राजद गठबंधन के बीच काफी मतों का फासला था। इस फासले में लोजपा भी शामिल थी। लेकिन इस बार लोजपा एनडीए से अलग सेल्फ चुनाव लड़ रहीं है। ऐसे में इस फासले से लोजपा का वोट दरकने वाला है। ऐसे में महागठबंधन एवं भाजपा के वोट फासले कम होने वाले है। ऐसे में इस सीट पर जदयू के कुर्मी वोटर का मत यदि विभाजित हुआ तो इसका फायदा महागठबंधन को होता दिख रहा है।

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-वामदल का महागठबंधन को मिल रहा साथ हितकर
-लोजपा के अलग चुनाव लड़ने का बीजेपी को घाटा
-स्थानीय उम्मीदवार के नाम पर सुरेन्द्र दास भी चर्चा में
– त्रिकोणात्मक लड़ाई के आसार, परिणाम चैका दे तो आश्चर्य नहीं 

बाह्राणों का मत भी विखंडित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। रोसड़ा के मतदाता प्रायः सभी दल से नाखूश है। कांग्रेस की सिटींग सीट रहने के बावजूद जिला नहीं बनने तथा बीजेपी की डबल इंजन की सरकार रहने के बावजूद जिला नहीं बनने एवं लोजपा के परिवार से हमेशा जुड़ा रहने वाला रोसड़ा आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। इसलिए यह वैसे तो किसी दल से खुश नहीं है। इसके कारण मतदाताओं में उत्साह नहीं देखा जा रहा है।विगत चुनाव में वामदल को 9543 वोट मिला था। इस बार वामदल कांग्रेस के साथ है। इस क्षेत्र में वामदल का भी अपना वोट है। यह महागइबंधन उम्मीदवार के लिए जहाॅं लाभदायक दिख रहा है वहीं बीजेपी गठबंधन में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल लोजपा अलग चुनाव लउ़ रहा है जो बीजेपी के लिए घाटा का सौदा है। इसलिए ओभर कफिडेन्ट में रहने वाला उम्मीदवार चुनाव जीत भी सकता है तो उसे हार भी मिल सकता है। इधर स्थानीय उम्मीदवार की लड़ाई को आयाम तक पहुॅंचाने के नाम पर पूर्व उपप्रमुख सुरेन्द्र दास भी लगातार कैम्प कर रहे है। स्थानीय के नाम पर इन्हें मिलने वाला मत भी कहीं ना कहीं बीजेपी एवं महागठबंधन को नुकसान कर सकता है। इसी प्रकार विधानन्द राम, विक्रम रजक,श्रवण कुमार, शैलेन्द्र चैधरी, शशिभूषण दास, रणधीर कुमार पासवान, विजय कुमार राम, आशा देवी भी अपने अपने रणनीति के तहत वोट मांग रहे है। मुख्य मुकाबले में शामिल बीजेपी के वीरेन्द्र कुमार, महागठबंधन के नागेन्द्र कुमार विकल एवं लोजपा के कृष्ण राज का त्रिकोणात्मक मुकाबले को अन्य उम्मीदवार बहुकोणीय बनाने को कसरत कर रहे है। ऐसे में मतदाता वर्ग के बीच अब चर्चा आरम्भ हो गयी है। यहाॅं तीन नबम्वर को चुनाव होना है।
प्रस्तुति:- संजीव कुमार सिंह, संपादक आईना समस्तीपुर संपादक मोबाईल नमबर 9955644631

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