बिहारः क्या जीतनराम मांझी एक बार फिर सीएम हो सकते है?

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||संजीव कुमार सिंह संपादक आईना समसतीपुर की समसामयिक रिपोर्ट||
बिहार में विधानसभा चुनाव परिणाम आ गया है। कांटे की लड़ाई में दोनों खेमों में सरकार बनाने की ललक अभी भी थमा नहीं है। ऐसे में छोटी छोटी party की महत्वाकांझा को पर लग जाना स्वाभाविक है। महत्वाकांझाा की पराकाष्ठा पर जीतन राम मांझी यदि एक बार फिर सीएम बनने का दावा कर दें तो कोई अचरज नहीं होगा। सत्ता में आने के लिए दोनों दलों की छटपटाहट है। ऐसे में चुनाव पूर्व गठबंधन के तहत एनडीए में बीजेपी को 74 सीट, जेडीयू को 43 सीट, वाीआईपी को 4 एवं हम को 4 सीट जीतने को मिली है। यह आंकड़ा 125 सीट का है। इसमें चार सीट वाले जीतन राम मांझी यदि खेमा बदल लेते है तो सरकार दूसरे खेमे का बनना तय हो जाता है। क्योंकि एक मात्र जीतन राम मांझी के खेमा बदले भर से सत्ता की चाभी एनडीए से जाता हुआ दिख रहा है। हम के चार विधायक के जाने के बाद एनडीए का जादुई आंकड़ा 121 पर आ जाता है जो बहुमत से एक कम हो जाता है। ऐसे में महागठबंधन को मिले 110 सीट प्लस ओवैसी को मिले पांच सीट प्लस बहुजन समाज पार्टी को मिला एक सीट प्लस लोजपा को मिला एक सीट प्लस निर्दलीय एक सीट मिलाकर सरकार बन सकती है। तोड़ जोड़ की राजनीति एवं महत्वाकांक्षा के कारण वैसे तो यह फिलहाल संभव नहीं दिख रहा है। लेकिन ऐसा हो सकता है। क्योंकि अधिकतम seat जीतने वाली भाजपा भी म्याउं म्याउ कर रहीं है। क्योंकि उसे डर है कि यदि नीतीश के सीएम पद को लेकर कोई भी फैसला लिया तो नीतीश कुमार भी महागठबंधन का रूख कर सकते है। क्योंकि सरकार बनाने के लिए आतुर कांग्रेस जदयू को अपने खेमे में लाने के लिए प्रयासरत रहीं है। केवल सीएम पद के लिए जब नीतीश कुमार अपना राजनीति दाव पर लगा सकते है तो क्या जीतन राम मांझी ऐसा क्यों नहीं कर सकते है। यह खेल मुकेश सहनी की पार्टी को तोड़ कर किया जा सकता है। क्योंकि वीआईपी को भी चार सीट पर सफलता मिली है। मुकेश सहनी अब राज्यसभा में जाने के फिराक में है। जीतन राम मांझी भी राज्यसभा या विधान परिषद की एक सीट का डिमांड रख सकते है। जबकि महज एक सीट वाली लोजपा भी मान मनौव्वल के लिए केन्द्र में मंत्री बनने की डिमांड कर सकती है। हांलाकि नीतीजे आने के बाद सरकार तो एनडीए की बन रही है? लेकिन वह इस बार टिकाॅउ होगी यह कह पाना मुश्किल है। लेकिन किसी भी हाल में कोई भी सरकार गिराना नहीं चाहेगा क्योंकि जनता सबको सबक सिखाती है यह देखा गया है। महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव के साथ चुनाव पूर्व का गठबंधन कांग्रेस, राजद, वामदल पहले से है। औवैसी, बसपा को अपने साथ जोड़कर वह आंकड़ा 116 तक पहुॅंचकर आमने सामने की राजनीति कर सकते है। इसके बाद लोजपा-निर्दलीय जो एक एक सीट पर जीती है। वे किस गइबंधन के साथ जुड़ती है। या विधानसभा में एकला चलो की राह अपनाती है। यह एक दो दिनों में साफ हो सकेगा। 14 नबम्वर तक वर्तमान सरकार का कार्यकाल है। इसलिए अगली सरकार का गठन 14 नबम्वर के बाद ही संभव है। इस बीच दीपावली एवं छठ का पर्व भी है। ऐसे में पर्व त्यौहारों के बीच नयी सरकार गठन की उत्सुकता एवं पहली बार विधानसभा पहुॅंचने वाले की दीपावी जश्न के साथ होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
प्रस्तुती: संजीव कुमार सिंह संपादक आईना समस्तीपुर मासिक पत्रिका

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