बिहार की जनता ने सबको सबक सिखाया है, भले ही कोई खुश हो रहा हो

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Description

||संपादक संजीव कुमार सिंह की खास रिपोर्ट||
बिहार की जनता ने सबको सबक सिखाया है। सत्ता की चकाचैंध में जेडीयू के नीतीश कुमार का कद छोटा कर यह साबित कर दिया है कि आप अधिक घमंड नहीं पाले, नहीं तो आपको भी सबक सिखा देंगे। बीजेपी को अधिक सीट देकर भी जनता ने नीतीश को ही सीएम बनते देखना चाहा है। बीजेपी यदि अपना सीएम थोपना चाहें भी तो वह थोप नहीं सकती है। ऐसा करते ही जेडीयू भड़क कर खेमा बदल सकती है। ऐसे में महागठबंधन खेमे से एक बार फिर से नीतीश ही सीएम बन जायेंगे। मुकेश सहनी को हरा कर यह दिखा दिया कि यदि इधर से उधर दल बदलते रहे तो भविष्य में आपको भी कहीं का नहीं छोड़ेंगे। हम पार्टी के जीतन राम मांझी को चार सीट देकर राजनीति में बने रहने का संकेत दिया है लेकिन जिद पर अड़ने का नहीं।
इसी प्रकार से राजद को अधिकतम seat देकर भी सीएम का पद रख लेने वाली बिहार की जनता ने कांग्रेस की हसती व जिद को ठिकाना लगा दिया है। जबकि गरीब गुरबों की लड़ाई लड़ने वाली वामदल को इस बार प्रतिष्ठा लौटाते हुए गरीबों की आवाज बुलंद करने के लिए अनुशंसा कर दी है। लेकिन यदि वामदल भी आवाज उठाने में कोताही बरता तो आने वाले दिनों में उसे भी ठीकाना लगा दें तो कोई आश्चर्य नहीं। मुसलामानों की आवाज को बुलंद करते हुए अपने ठोस ईरादों पर कायम रहने के लिएउ ओवैसी को पांच सीट देकर राजनीति में आगे आने के लिए प्रोत्साहित अवश्य कर दिया है, लेकिन वे बिहार की राजनीति में ठोस दिशा ले पाते है या नहीं? यदि नहीं ले पायें तो उन्हें भी कद छोटा कर दें तो कोई अचरज नहीं। स्वतंत्र उम्मीदवार चकाई से सुमित कुमार सिंह को जीत दिलवाकर यह दिखाया है कि अच्छे कार्य करने पर टिकट की कोई आवश्यकता नहीं है। स्वतंत्र उम्मीदवार को भी जनता जीत दिलवा सकती है। लोजपा के दोमुंही कार्य करने के तरीके से नाखुश जनता ने उसे ठीकाना पर लाकर खड़ा कर दिया है। इस प्रकार से जनता ने अपने राजनीतिक भविष्य को संयमित कर दिया है। संपादक संजीव कुमार सिंह की नजर में बिहार की जनता ने बिहार में अपने हक की लड़ाई एवं प्रशासनिक व्यवस्था को अपने हाथों में रखने के लिए सभी राजनीतिक दलों पर भरोसा किया भी है और नहीं भी किया है। क्यों कि महज बहुमत देकर राजग को सरकार बनाने अवश्य दिया है, लेकिन मजबूत विपक्ष देकर उसे हर मोर्चा पर घेरने का आर्शीवाद भी दिया है। क्यों कि इससे पहले बिहार की जनता ने वर्ष 2010 में दो तिहाई बहुमत देकर बीजेपी एवं जेडीयू गठबंधन को महत्वपूर्ण फैसले लेने का अवसर दिया था। वर्ष 2015 में महागठबंधन को भी यह अवसर दे चुकी है। लेकिन यह बहुमत का जनहित में तत्कालीन सीएम नीतीश कुमार ने दोनों बार इस्तेमाल नहीं किया है। इसलिए जनता ने सामान्तर सरकार की परिकल्पना के तहत सरकार व मजबूत विपक्ष बनाकर अपना हित साधने का प्रयास किया है।
प्रस्तुतीः- संजीव कुमार सिंह संपादक आईना समस्तीपुर मासिक पत्रिका 9955644631

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