बिहारः मांझी सीएम एवं सहनी डिप्टी सीएम बन जाय तो आश्चर्य नहीं?

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बिहार में विधानसभा चुनाव सम्पन्न हो गया। परिणाम भी निकल आयें। लेकिन सरकार गठन में कुछ भी संभव और असंभव दिख रहा है। जनमत का अपहरण हमेशा से होता रहा है। शायद इस बार भी हो जाय तो कोई आश्चर्य नहीं ।ऐसे में छोटे छोटे दल की महत्वाकांक्षा को बल मिल रहा हैं ।लगता है जीतनराम मांझी के भाग्य खुलने वाले हैं। आईना समस्तीपुर मासिक पत्रिका के संपादक संजीव कुमार सिंह का मानना है कि जीतन राम मांझी ने भी अपनी बात रख दी है। उनकी मानें तो मांझी ने कहा है कि वे मंत्री नहीं बनेंगे। क्योंकि वे पहले मुख्यमंत्री बन चुके है। यह एक तरह का ईशारा भी हो सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। ऐसा बीजेपी नहीं कर सकती है। क्योंकि उसने नीतीश कुमार के नेत्त्व में चुनाव जीता है। लेकिन महागठबंधन में शामिल कांग्रेस एवं वामदल यदि मांझी को सीएम स्वीकार कर लें तो तेजस्वी यादव की हाॅं मिलते ही यह संभव हो सकता है। संजीव कुमार सिंह का मानना है कि हम एवं वीआईपी दोनों हाल के दिनों तक महागठबंधन के अंग रहे है। ऐसे में चुनाव हारने के बाद भी यदि महागठबंधन मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम का आॅफर कर दें तो बात बन सकती है। महागठबंधन में कांग्रेस एवं वामदल बीजेपी के साथ हाथ मिला नहीं सकते है। ऐसे में राजद यदि उदारता दिखाकर मांझी को सीएम पद का आॅफर कर दें तो कोई आश्चर्य नहीं है। कांग्रेस चाहती है कि तेजस्वी डिप्टी सीएम एवं मुकेश सहनी को यह पद मिल जाय तो सरकार महागठबंधन की बन सकती है। मांझी की महत्वाकांझा को नीतीश कुमार भी जान रहे है। वे भी जल्दी सीएम बनने के लिए हाॅं नहीं कर रहे है। इसलिए आज शाम तक दोनों दल अपनी अपनी रणनीति साफ कर देंगे। बता दें कि महागठबंधन में कांग्रेस नीतीश को खुला आॅफर दे चुकी है। लेकिन नीतीश की महागठबंधन में जाने की संभावना कम है। ऐसे में महागठबंधन मांझी एवं सहनी पर दाव लगाकर सत्ता में आ सकता है। संपादक संजीव कुमार सिंह कहते है कि राजनीति में कुछ भी संभव है। संजीव कुमार सिंह राजनीतिक विश्लेषकों में से एक है। उनका मानना है कि जब नीतीश कुमार मांझी को सीएम बना सकते है। बाद में फिर हटाने के लिए भी विधायकों का पैरेड करवा सकते है। तो तेजस्वी भी ऐसा कर दें तो कोई आश्चर्य नहीं? ऐसे में सवाल उठता है कि महागठबंधन को 110 सीट हासिल है। ओवैसी की पार्टी बिना शर्त समर्थन की घोषणा कर चुकी है। ऐसे में मांझी एवं सहनी के चार चार विधायक को मिलाकर महागठबंधन की सरकार बनाने के जादुई आंकड़े 122 से अधिक 123 हो जाता है। बीएसपी का एक विधायक भी महागठबंधन के पक्ष में समर्थन देकर मंत्री पद ले सकता है। ऐसे में यह आंकड़ा 124 पहुॅंच सकता है। निर्दलीय सुमित कुमार सिंह ने चकाई से राजद को परास्त किया है लेकिन वे भी मंत्री पद मिलने पर किसी भी पार्टी को अपना समर्थन दे सकते है। ऐसे में महागठबंधन की सरकार के पास कुल 125 का आॅंकड़ा हो सकता है।
यदि ऐसा नहीं हुआ तब राजग की सरकार चुनाव पूर्व गठबंधन के आधार पर 125 सीटों के साथ बन सकती है। ऐसे में बीएसपी एवं निर्दलीय एवं लोजपा ये तीनों में भाग्यवान मंत्री पद हासिल कर सकते है। क्योंकि नीतीश कुमार यदि सीएम बनते है तो वे बहुमत का जुगाड़ पहले ही कर के ही कदम उठा सकते है। तोड़ जोड़ की रणनीति के कारण मांझी एवं सहनी का दल टूट भी सकता है। ऐसे में भी छोटे छोटे दलों की भुमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। संपादक संजीव कुमार सिंह की मानें तो बिहार में इस बार चाहें जिसकी भी सरकार बनें लेकिन चलेगा सभी दलों का। ऐसा मानकर चल रहे है।
प्रस्तुती संजीव कुमार सिंह संपादक आईना समस्तीपुर मासिक पत्रिका 9955644631

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