बिहार में मुखिया से बड़ा हुआ वार्ड सदस्य का कद , वार्ड सदस्य की अध्यक्षता में होगा विकास कार्य

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आईना समस्तीपुर। न्यूज

बिहार में मुखिया की दबंगता को देख कर मिल रहीं शिकायतों को भांप कर सरकार ने आखिर वह फैसला ले ही लिया, जो उसे 15 वर्ष पूर्व लेना चाहिए था। लगातार विधायक एवं सांसद से मिल रहीं शिकायतों को एक झटके में ही सरकार ने समाप्त कर दिया। नीतीश कुमार इसे अपने सात निश्चयों का आधार मान रहीं है। लेकिन यह है मुखिया के अधिकारों को कम करने की सोची समझी साजिश तथा वार्ड स्तर अर्थात पंचायती राज व्यवस्था के सबसे नीचले पायदान से विकास की गति को तेज करने की कार्रवाई। सूबे में 114733 वार्ड है। इतने ही वार्ड सदस्यों के कंधों पर विकास की जिम्मेवारी सौंपी गयी है। सरकार की योजना हैकि प्रति पंचायत एक करेाड़ 69 लाख82 हजार रूपये खर्च कर घर घर नल जल योजना को लागू किया जाए। गली नाली योजना समेत नीतीश के सात निश्चय इसमें शामिल है। वार्ड सदस्य योजना के लिए पूर्णतया जिम्मेवार होंगे। ऐसे में यह जिम्मेवारी पहले पंचायत के मुखिया का हुआ करता था, जो अब वार्ड सदस्य को होगा। एक पंचायत में न्यूनतम 8 से लेकर अधिकतम 20 वार्ड का परिसीमन है। सरकार के इस प्रावधान से एक साथ दो मकसद पूरा हुआ है। एक मुखिया का अधिकार कम कर वार्ड सदस्य को अपना बनाना तथा दूसरा विधायक एवं सांसद की शिकायतें दूर करना।

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