वित्त मंत्रालयःनोटबंदी के बाद करदाताओं द्वारा संशोधित आयकर रिटर्न दाखिल करने पर स्‍पष्‍टीकरण

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||ASNEWS||SANJEEV KUMAR SINGH||15 DEC 2016||

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 139(5) के वर्तमान प्रावधानों के तहत किसी भी व्‍यक्ति द्वारा संशोधित रिटर्न तभी दाखिल किया जा सकता है जब अधिनियम की धारा 139(1) के तहत रिटर्न भरने के बाद अथवा धारा 142(1) के तहत जारी नोटिस के प्रत्‍युत्‍तर में रिटर्न भरने के बाद उसे अपने रिटर्न में किसी चूक अथवा किसी गलत विवरण के बारे में पता चलता है। 8 नवम्‍बर, 2016 को नोटबंदी के बाद कुछ करदाता आय, उपलब्‍ध नकदी, मुनाफे इत्‍यादि के आंकड़ों में हेराफेरी करने के उद्देश्‍य से पूर्ववर्ती निर्धारण वर्ष के लिए खुद के द्वारा दाखिल किये गये आयकर रिटर्न को संशोधित करने हेतु इस प्रावधान का दुरुपयोग कर सकते हैं, ताकि चालू वर्ष की अघोषित आय (चालू वर्ष में पुराने नोट के रूप में रखी गई अघोषित आय सहित) को पूर्ववर्ती रिटर्न में दर्शाया जा सके।

यह स्‍पष्‍ट किया जाता है कि अधिनियम की धारा 139(5) के तहत संशोधित आयकर रिटर्न दाखिल करने के प्रावधान में यह साफ तौर पर लिखा गया है कि मूल आयकर रिटर्न में दर्ज किसी गलत विवरण अथवा चूक को ठीक करने के लिए ही संशोधन किया जा सकता है, न कि पूर्व में घोषित आय में संशोधन करने के उद्देश्‍य से इसमें संशोधन किया जा सकता है, ताकि पूर्ववर्ती घोषित आय के स्‍वरूप, सार एवं मात्रा में व्‍यापक परिवर्तन किए जा सकें।

करदाताओं को यह जानकारी दी जाती है कि यदि आयकर विभाग को किसी ऐसे मामले का पता चलता है जिसमें आय, उपलब्‍ध नकदी, लाभ इत्‍यादि में हेराफेरी की गई है अथवा खातों में हेर-फेर किया गया है, तो वैसी स्थिति में इन मामलों की छानबीन की जा सकती है, ताकि संबंधित वर्ष के दौरान वास्‍तविक आमदनी का पता लगाया जा सके। इस तरह के मामलों में कानूनी प्रावधान के मुताबि‍क जुर्माना भी लगाया जा सकता है/अभियोजन शुरू किया जा सकता है।

12 सितंबर, 2016 को जीएसटी परिषद की अधिसूचना जारी होने के बाद से लेकर अब तक परिषद की छह बैठकें नई दिल्ली में हो चुकी हैं। ये बैठकें 22-23 सितंबर 2016, 30 सितंबर, 18-19 अक्टूबर, 3-4 नवम्बर, 2-3 दिसंबर और 11 दिसंबर 2016 को आयोजित की गईं। इन बैठकों के दौरान अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिये गए हैं, जिससे 01 अप्रैल, 2017 से जीएसटी को लागू करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

जीएसटी परिषद की इन छह बैठकों में लिये गए कुछ महत्वपूर्ण निर्णय निम्नलिखित हैं

-जीएसटी से छूट के लिए सीमा सामान्य राज्यों के लिए 20 लाख रुपये होगी (संविधान के अनुच्छेद 279ए में उल्लिखित विशेष श्रेणी वाले राज्यों के लिए सीमा 10 लाख रुपये होगी)

– संरचना योजना से लाभ उठाने की सीमा 50 लाख रुपये होगी। सेवा प्रदाताओं को संरचना योजना के दायरे से बाहर रखा जाएगा।

– जीएसटी को लागू करने के कारण राज्यों को राजस्व नुकसान की भरपाई 5 वर्षों तक करने हेतु राज्य के राजस्व के लिए आधार वर्ष 2015-16 होगा और 14 फीसदी की निश्चित वृद्धि दर इस पर लागू होगी।

-जीएसटी के तहत वस्तुओं के लिए दरों के बैंड 5, 12, 18 एवं 28 फीसदी होंगे और इसके अलावा छूट प्राप्त वस्तुओं की एक श्रेणी होगी। यही नहीं, राज्यों को मुआवजे की अदायकी के लिए कुछ विशेष वस्तुओं जैसे की लक्जरी कारों, एरेटेड ड्रिंक, पान मसाला और तंबाकू उत्पादों पर 28 फीसदी की दर के अलावा उपकर लगाया जाएगा।

जीएसटी परिषद में विचार-विमर्श अत्यंत सौहार्दपूर्ण रहे हैं और अब तक सभी निर्णय आम सहमति से लिए गए हैं। परिषद के सदस्य अत्यंत सकारात्मक नजरिये के साथ बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं और तय समय सीमा के मुताबिक जीएसटी को लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

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