बिहार:बांध टूटने से मुजफ्फरपुर शहर में घुसा पानी

बिहार में बाढ़ का प्रकोप जारी है। राज्य के 18 जिले बाढ़ की चपेट में हैं। बाढ़ का कहर थमा भी नहीं था कि आज मौसम विभाग ने फिर से सुबे में बारिश की चेतावनी जारी कर दी है। गया, भागलपुर,अररिया, कटिहार दरभंगा और भी कई जिलों में बारिश की संभावना जताई है। अगर आज फिर से बारिश होती है तो जिलों की स्थिति और भी गंभीर हो जाएगी।रजबाड़ा बांध टूटने के बाद शहर की ओर बढ़ने लगा पानी| नये इलाकों में पानी पहुंचने से मोहल्लेवासियों में दहशत|
रजवाड़ा में टूटे तटबंध की मरम्मत का काम युद्धस्तर पर जारी |समस्तीपुर में नहीं थम रहा है बाढ़ का कहर| बूढ़ी गंडक और करेह में लगातार बढ़ रहा है पानी
| कल्याणपुर के तीन स्लूइस गेट पर नहीं रूक रहा है पानी का रिसाव| इधर, समस्तीपुर और मुजफ्फरपुर शहर में भी बाढ़ का पानी घुस गया है। रविवार का दिन गांववालों के लिए दहशत भरा रहा। उफनाई बूढ़ी गंडक का पानी रविवार को शहर के कई निचले इलाकों में घुस गया। शहर से सटे मुशहरी के रजवाड़ा में शनिवार देर रात बूढ़ी गंडक का दायां तटबंध टूटने से आसपास की 12 पंचायतें जलमग्न हो गईं। उधर,गोपालगंज जिले में सिधवलिया व बैकुंठपुर के नए इलाके में पानी फैल गया है। वहां सेना के जवान राहत कार्य में लग गए हैं। कोसी व सीमांचल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तेज धूप व जमा पानी के सड़ने से महामारी की आशंका बढ़ गई है। मुजफ्फरपुर में बाढ़ के पानी से राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र की दीवार ढह गई। दोपहर तक मुशहरी थाना, पीएचसी, पशु अस्पताल के अलावा कई स्कूलों में भी पानी घुस गया। इस आपदा से लगभग 50 हजार की आबादी प्रभावित हुई है। यहां का पानी तेजी से शहर की ओर बढ़ रहा है। इससे शहर के पूर्वी क्षेत्र पर खतरा |
गौरतलब है कि बिहार में बाढ़ से मरने वालों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। बीते दिनों ये संख्या 200 के पार पहुंच गई। लाखों लोग गांव छोड़कर जा चुके हैं। सवा करोड़ से ज्यादा की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। एनडीआरएफ की टीमें राहत कार्य में जुटी हैं। गोपालगंज, अररिया और किसनगंज में पानी का स्तर थोड़ा कम हुआ है, लेकिन मुजफ्फपुर और समस्तीपुर में पानी घुसने लगा है। लोगों में दशहत है कि अगर बारिश हुई तो कई और नदियां उफान पर आ जाएंगी। बिहार में नदियों का खतरे के निशान से ऊपर बहने का सिलसिला जारी है। इनमें उफान बरकरार है।
सोमवार सुबह छह बजे श्रीपालपुर में पुनपुन 170 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। वहीं, बूढ़ी गंडक भी कई जगहों पर खतरे के निशान से पार थी। यह लालबगियाघाट में 134, रोसड़ा में 98, सिकंदरपुर में 86, अहिरवलिया में 77, समस्तीपुर में 31 और खगुड़या में 12 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। कोसी का जलस्तर बलतारा में 194 और कुरसेला में खतरे के निशान से 38 सेंटीमीटर ऊपर था। सुबह छह बजे गंगा का जलस्तर फरक्का में 90 और साहेबगंज में 64 सेंटीमीटर ऊपर था।

मंगलवार सुबह तक दोनों जगहों पर इसके जलस्तर में 4 से 6 सेंटीमीटर की वृद्धि की संभावना है। वहीं, दरौली में घाघरा 39 और गंडक डुमरियाघाट में खतरे के निशान से 69 सेंटीमीटर ऊपर थी। बागमती बेनीबाद में 60 और हायाघाट में 12 सेंटीमीटर ऊपर थी। घाघरा का जलस्तर गंगपुरसिसवन में खतरे के निशान से 58 सेंटीमीटर ऊपर था। इससे पहले वर्ष 1983 में यहां इस नदी का जलस्तर 58.1 मीटर मापा गया था। यह सुबह छह बजे उच्चतम जलस्तर से 39 सेंटीमीटर नीचे थी।

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